माना इतिहास ने कहा तुझे शक्तिशाली और प्रचंड,
हो सोचते तुम, देते सभी को मार,
वे मरते नही, नाही बना सकते तुम मुझे अपना आहार,
आराम, निंद्रा रूप तेरे जो सभी को सुखद भाते,
तुम हो इसका बरा रूप, जो सभी को चिर निंद्रा दे जाते,
तुम तो भाग्य और समय के आगे लाचार हो,
अवसर, निरास व्यक्तीयो के कृपा के पात्र हो,
जहर, बिमारी, युद्ध में ही तुम्हारा बॉस हो.
इतना घमंड से तुम फूल क्यों जाते ?
निंद्रा एक छोटी शास्वत रूप में जगा जाते,
........................................................................................................................Neeraz kumar.






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